Ganesh Chaturthi 2023: क्या आप जानते हैं कि 10 दिनों तक ही क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी? यहां जानिए कारण

श्री गणेश जी लोकमंगल के देवता है श्री गणेश संपूर्ण लोक में मंगल करने वाले देता है लेकिन अगर कहीं पर अमंगल होता है तो उसे दूर करने के लिए श्री गणेश वहां पर आते हैं गणेश जी रिद्धि सिद्धि के स्वामी है और पूरे संसार में रिद्धि सिद्धि दायक है

Ganesh Chaturthi 2023: गणों के अधिपति श्री गणेश को देवताओं में प्रथम पूज्य माना जाता है सबसे पहले श्री गणेश जी की पूजा की जाती है उसके बाद अन्य देवताओं की पूजा की जाती है किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले से श्री गणेश जी पुजा की जाती है क्योकि गणेश जी विघ्नहर्ता है ओर श्री गणेश सभी विघनों को दूर करते है श्री गणेश जी सम्पूर्ण लोक के मगल के देवता है श्री गणेश लोक का मगल करते है लेकिन जहा भी अमगल होता है वहा श्री गणेश अमगल को दूर करने के लिए आते है गणेश जी रिद्धि सीधी के सुवमी है इसीलिए उनकी कृपा से सपदा ओर समृद्धि का कभी भी अभाव नही रहता है श्री गणेश जी को दूर्वा ओर मोदक बहुत प्रिय है उद्यतिथि के उनुसर 19 सिम्बर को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है 

गणेश चतुर्थी 2023 शुभ मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार श्री गणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करने का शुभ मुहूर्त 19 सितंबर को सुबह 10:00 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 1:16 तक रहेगा

श्री गणेश जी को जरूर चढ़ाएंगे जी जी

बौद्धिक ज्ञान के देवता कहे जाने वाले गणपति के आशीर्वाद से व्यक्ति का बौद्धिक विकास होता है इसीलिए श्री गणेश जी के भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए सच्चे मन से और पूरी श्रद्धा से उनकी आराधना करते हैं भक्त श्री गणेश जी की पूजा करते समय छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखते हैं ताकि उनसे किसी तरह की कोई गलती ना हो जाए लेकिन अक्सर जानकारी ना होने के कारण वह भगवान श्री गणेश जी को यह कुछ चीजें चढ़ाना भूल जाते हैं पहला मोदक का भोग और दूसरा दूर्वा (एक प्रकार की घास) और तीसरा घी यह तीनों चीजें श्री गणेश को अधिक प्रिय है इसीलिए जो भी व्यक्ति पूरी आस्था और श्रद्धा से गणपति की पूजा में यह चीज है चढ़ाता है तो उस व्यक्ति को श्री गणेश जी का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है

क्यों चढ़ाते हैं गणपति को प्रसाद में मोदक

रिद्धि सिद्धि के दाता गणपति के पूजन में प्रसाद के रूप में खास तौर पर मोदक का भोग हमेशा लगाया जाता है कहा जाता है कि मोदक गणपति को बहुत ही पसंद है लेकिन इसके पीछे की पौराणिक मान्यता भी हुई है पुराणों के अनुसार गणपति और परशुराम के बीच एक बार युद्ध चल रहा था उस दौरान श्री गणेश का एक दांत टूट जाता है इसके चलते उन्हें खाने में काफी ज्यादा परेशानी होने लगती है उनके इस कष्ट को देखकर उनकी माताओं के लिए कुछ ऐसे पकवान बनाते हैं जिसे खाने में भी आसानी से खा सकें और उस खाने से उनके दांत में दर्द ना हो उन्हीं पकवानों में से एक मोदक है मोदक खाने में काफी मुलायम होता है माना जाता है कि श्री गणेश को मोदक बहुत पसंद आया था और तभी से वह उनका पसंदीदा मिष्ठान बन गया था इसीलिए भक्त गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए मोदक का भोग जरूर लगाते हैं हालांकि मोदक के विषय में कुछ पौराणिक धर्म शास्त्रों में भी बताया गया है मोदक का अर्थ होता है खुशी या आनंद गणेश जी को खुशहाली और शुभ कार्यों का देवता माना गया है इसीलिए श्री गणेश जी को मोदक चढ़ाया जाता है


गणेश चतुर्थी के दिन क्यों निषेध है चंद्र दर्शन

माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए नहीं तो व्यक्ति के ऊपर मिथ्या कलम या नहीं बिना किसी वजह से धरती पर कोई झूठा आरोप लग सकता है पुराणों के अनुसार एक बार भगवान श्री कृष्ण ने श्री गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन किया था जिसकी वजह से उन्हें भी मिथ्या का शिकार होना पड़ा गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को लेकर एक और पौराणिक मत है जिसके अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन ही भगवान गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया था जिसकी वजह से ही चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना मना है अगर कोई भूल से चंद्र दर्शन कर लेता है तो इस दोष के निवारण के लिए नीचे बताए हुए मंत्र का 28,54,108 बार जाप कर लेना है श्रीमद्भागवत गीता के दसवें स्कंध के 57 अध्याय में पाठ करने से भी चंद्र दर्शन का दोष समाप्त हो जाता है





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